नारी तेरे भिन्न रूप हैं
तुम सृष्टि कहलाती हो 
जग का लालन-पालन करने
विभिन्न रूप धर जाती हो

माँ बनकर वात्सल्य को जीती
अपना दुलार लुटाती हो
बनकर यशोदा कान्हा की तुम
ममता - स्नेह सिखाती हो
मातृत्व का  रूप हो कैसा
ये सबको सिखलाती हो------

नारी तेरे भिन्न रूप हैं
तुम सृष्टि कहलाती हो
जग का लालन-पालन करने
तुम भिन्न रूप धर जाती हो

शक्ति का स्वरूप दिखाती
नारी की क्षमता दिखलाती हो
कहीं अहिल्या बन सुशासन करती
कभी रानी लक्ष्मी सा शौर्य दिखाती हो
कहीं हिमा,बबीता,कर्णम बनकर
देश का परचम लहराती हो------

नारी तेरे भिन्न रूप हैं
तुम सृष्टि कहलाती हो
जग का लालन-पालन करने
विभिन्न रूप धर जाती हो

बलिदान की  नयी परिभाषा गढ़ती
तुम  सब पर ही भारी हो
पन्ना धाय बन त्याग है करती
रानी हांडा सी बलिदानी हो
कहीं नीरजा बन  आतंक से लड़ती
तुम तो जग कल्याणी हो-----

नारी तेरे भिन्न रूप हैं
तुम सृष्टि कहलाती हो
जग का लालन-पालन करने
विभिन्न रूप धर जाती हो।।

आशा झा सखी✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼