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समुद्र के जैसे दिल था यह मेरा,
अब खारा हो चला है,
क्या करें इश्क में यह दिल---
बेचारा हो चला है,
तन्हाईयों में कुछ इस कदर---
सोच में पड़ गए,
कल मदमस्त थे और आज---
इश्क में क्यों जकड़ गए,
इश्क बड़ा निर्मोही है---
सौदागरी यह करता है,
मोह देकर यह बदले में---
दिल का सौदा करता है,
बदल देता है एक पल में---
दिल कुछ कहता है,
और दिमाग कुछ कहता है,
सुबह, शाम, दिन और रात---
दिल आहे भरता रहता है,
रात गुजरती ख्यालों में,
दिन मुलाकातों में गुजरता है,
इश्क एक जुनून है,
यह हद से जब गुजरता है---
हर एक रूप रंग में,
हर संगीत की धुन में,
हर गली बाजारों में,
उनकी एक नजर के---
लिए तरसता है,
इश्क ऐसी है बुरी बला---
ना किसी का होता भला,
दिल के बदले में दिल देकर---
खुदका ही तो दिल जला,
समुद्र के जैसा दिल था मेरा---
अब खारा हो चला है,
क्या करें इश्क में दिल---
अब बेचारा हो चला है,
संगीता वर्मा✍✍

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