साथी एक साथ मे 
हाथों को ले अपने हाथ में
कोई रहे ना बीच राह में
पकड़े जिनको हम भी बाह में
आगे मंजिल राही सारे
अलग अलग है देखो सारे
कोई हास्य कोई वीर से
कोई रौद्र कोई तीर से
भाषा के है राही सारे
लेचल इनको बिना सहारे
बीच मे खड़े ये क्यू विचारे
राही की साथी ही पुकारे
राह तके है साथी सारे 
ले चल सबको गंगा किनारे 
मन सबको पुकारे
राही छूट ना हमारे 
साथी चल 

                       संध्या पंवार 
                       राजस्थान