बचपनमें जब आंसू आये माँ याद आ जाये।
आज जब माँ याद आ जाये आंसू ला जाये।

दिल जलता है रात दिन, बताओ क्या करें?
आज भी माँ ज़िंदा है, पर जुदाईयाँ खा जाये।

सहना माँ की आदत है, दर्द सहे गुस्सा भी करे।
माँ है, माँ के हर गुस्से को जायज़ माना जाये।

ख़िदमत व् बेहतर सुलूक उसे खुश कर जाये।
उसके हर कदम के नीचे से वो जन्नत पा जाये।

कुछ भी करने को तैयार, सारे जहाँ से लड ले।
एक माँ ही तो है जो सारे जहाँ पर छा जाये।

साथ उम्र के बढ़ते बढ़ते, तकलीफे बढ़ जाये।
 हर तकलीफ उसकी तो आज मुझे रुला जाये।

प्यार भरा है उस मूरत में, साथ रहना दिल चाहे।
मांगू हर दम दुआ की वो हमें छोड़ कर ना जाये।



              फिरोज दहिवाला