होली खेले अब हम ऐसे
प्यार को प्यार
बाहों को बाहें
नैनो को नैना थे जैसे
होली खेले अब हम ऐसे
बाहों में बाहों का आकर्षण
नैनो का सम्मोहन जैसे
रंग ,अबीर, गुलाल सा
रंग चढ रहा था जैसे
होली खेले हम भी ऐसे
क्या पानी क्या रंग की होली
क्षणिक आकर्षण
रंग चढ़ना ,उतरना था जैसे
प्यार का रंग चढ गया ऐसे
गालो पर लाली छाई थी
हम पर जैसे
होली खेले अब हम ऐसे।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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