*वो नीड़ बना
बसे भक्ति व प्रीति
हिय की डाली
* देह से रुह
समर्पित सर्वस्व
प्रेम पपीहे
* प्रेम का मेह
बतरस बरसे
भीगते पंछी
* दिन व रैना
गाये तोते व मैना
प्रेम तराने
*पंख कोमल
उड़ान उस क्षोर
ब्रह्म कमल
* गगन अटा
फुहारे सहलाती
प्राण पखेरू
*युगल पाखी
पगडंडी प्रीत की
डोरियां बंधी
मीनाक्षी कुमावत 'मीरा'
माउन्ट आबू, राजस्थान

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