देखो भोलेनाथ चले अपनी गौरा को ब्याहने, गौरा को ब्याहने अपनी भार्या बनाने-
नाथों के नाथ चले अपनी गौरा को ब्याहने,गिरिजा को ब्याहने अर्धांगिनी बनाने-------
तन पर भस्म श्मशान की लगाये
हाथों में त्रिशूल, बाघाम्बर सुहाये
गले में सजाये कालसर्पो की माला
शिव शंभु लगे है बड़ा भोला भाला
संग में सवारी नंदी की सजाये
डम-डम डम-डम, डम डमरू बजाये
नाथों के नाथ चले अपनी गौरा को ब्याहने,गिरिजा को ब्याहने अपनी
अर्धांगिनी बनाने--------
चले हैं बराती ढोल- मृदंग बजाये
नाचे भूत- भूतनी,प्रेत- प्रेतनी को नचाये
साथ में चले हैं देव, गन्धर्व भी आये
सकल देव वर की शोभा बढ़ाये
देख ये बारात नगर निवासी घबराये
भोले ये देख मंद-मंद मुस्काये
नाथों के नाथ चले अपनी पारो को ब्याहने, गिरिजा को ब्याहने उसे अपना बनाने--------
देख वर का ये रूप प्रचंड
माँ मैना का अवरुद्ध हुआ कंठ
जनक हिमाचल बार-बार सोचे
मेरी सुता का ये भाग्य है कैसे
सखी- सहेलियां डर कर भागे
गिरिजा को जा सब हाल बतावैं
अपने तप का तूने कैसा फल पाये
बड़ा भयानक वर द्वार है आये
देखो भोलेनाथ अपनी लीला दिखावें
गौरा रानी खड़ी मंद- मंद मुस्कावें
नाथों के नाथ चले अपनी गौरा को ब्याहने, गौरा को ब्याहने उसे भार्या बनाने------
छोड़ स्वर्ण-रत्न गौरा फूलों को उठायें
पुष्प-कलियों से अपना रूप सजायें
देख ये व्यवहार सखी अचंभित हो जायें,गौरा वर के अनुरूप जब खुद को दिखायें
पाणिग्रहण का सब उत्सव मनायें
गिरिजा हैं अनुरूप शिव खुश हो जायें
शिव और शक्ति मिलकर ब्याह रचायें
प्रेम अटल है उनकाये सबको दिखलायें,नाथों के नाथ चले गौरा को ब्याहने,गिरिजा को ब्याहने,अपनी भार्या बनाने---------
आशा झा सखी✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼

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