आज शिवरात्रि है घर घर में यह बात है
नाच रहे भोले बाबा डमरु उनके हाथ है
मस्तक पर चंदा ,बालो में गंगा बिराजे
खुशी में झूमे नागौ से किया श्रृंगार है
भभूति अंग विराजे देवता झूमे साथ हैं
नंदी पर आप विराजे मस्त मत वाला साथ है
संग भूत प्रेत सोए नाचे दे दे ताल हैं
संग खड़ी खप्पर वाली जो हुक्म बजाने वाली है
बरात तेरी अद्भुत निराली देवों से वर्णी ना जाए रे
, गोरा को ब्याहने देखो आए त्रिपुरारी रे
दुनिया का सब खेल तुम्हारा खेल खिलौने वाले
तीनों लोकों के स्वामी तुमको लाखों प्रणाम हे
दीन दयाला करुणानिधि गोरा शंकर कर दो भव से पार।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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