मुझसे अलग होकर तुम सलामत हो,चलो अच्छा है।
हम भी जी सकते है तुम्हारे बिना।
पर हमारी तुम्हारी जैसी फितरत नहीं बदल जाने की।
वो आकर मिल जाते है जो बिछड़ जाते है।
पर वो कभी नही मिलते जो बदल जाते है।
वक्त ने ही तुमसे मिलवाया और वक्त ने ही जुदा कर दिया।
अब दोष किसको दूं,तुम्हे या वक्त को?
हरप्रीत कौर
1 टिप्पणियाँ