न रखो तुम,किसी से उम्मीद
न रहो तुम ,किसी पे निर्भर ,
पल-पल बदल जाती उम्मीद
बन जाओ तुम ,आत्मनिर्भर ।।
रखो भरोसा खुद पर तुम
उम्मीद खुदी से करना ,
रहना डटे सच पर तुम
कभी हार से ना डरना ।।
उम्मीद को बना अपना दोस्त
सच्चाई को अपना हमसफर,
चलना अब तुमको निरंतर
जिंदगी के अनजाने डगर ।।
✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर
कर्नाटक

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