नारी तुझ पर दिन भी एक आये।
फिरभी निष्ठुर मर्द तुझे ठुकराये।
नारी बिना जीवन अधूरा, सच है।
यह सब लेख पत्रिकाओं में आये।
नारी तो नारी है, प्रेम की एक मूरत।
फिर भी समाज उसी को जलाये।
ज़ुल्मो सितम की तो हद्द है जब की।
थक हार नारी ख़ुदकुशी कर जाये।
माँ बहन बीवी है नारी, हर रूप में।
कुछ न कुछ नया कर कर दिखाये।
सिर्फ सन्मान करने तख्ते पर लाते।
तख्ते से उतरे, फौरन लात दिखाये।
नारी की हालत, पुरूषों का समाज।
बस लातें घर पर सिर्फ खाना बनाये।
नारी इच्छा कोन पूछे क्या चाहे है वो।
अपनी इच्छा मार मार, जीवन बिताये।
कई बार होता है कि ना सुधरेगी हालत।
नारी कोई विद्रोह करे, डायन कहलाये।
एक दुआ खुदा से, हाल नारी के सुधरे।
ऐसा कर की नारी, सचमें नारी कहलाये।
फिरोज दहिवाला

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