नौकरी जब बेटे ने पाई
मां बहुत हर्षाई
नौकरी पर पहला दिन था
सूट - टाई पहन कर वह खड़ा था
जब घर से वो निकलने लगा
मां ने मीठा मुंह उसका किया
थोड़ा सा दही भी खिलाई
और उसकी नजर भी उतारी
जैसे ही उसने घर के बाहर कदम रखा
सड़क पार करती बिल्ली आने पर रुका
मां ने कहा थोड़ी देर रुक जा बेटा
अपशकुन हो गया है ठहर जा जरा
मां कैसी बातें करती हो
पढ़ी - लिखी हो क्यों इन बातों में उलझी हो
मां की बात ना मानकर वह आगे बढ़ा
तभी एक गाड़ी तेजी से आई, वह चीख पड़ा
मां ने दौड़कर उसे गले लगाया
बेटा उस बिल्ली को गाड़ी से बचा ना पाया
बिल्ली वहां मरी पड़ी थी
गाड़ी भी जा चुकी थी
किसी को कोई फर्क ना पड़ा
लेकिन बेटा सोचने लगा
लगता है बिल्ली के लिए मैं अपशकुन था
काश वह बिल्ली थोड़ी देर रुक जाती
तो शायद थोड़ा और जी पाती ।



              धनु दयाल