हां मैं पानी हूं
जीवन की अमिट कहानी हूं
बादलों से बरसी हूं
जमीन पर हरियाली लाई
मिलकर बूंद बूंद बारिश बन आई
सर्दी में ओस की बूंद
गर्मी में तपते लोगों की आस
हां मैं पानी हूं
कभी मैं खारा कभी मैं मीठा
नदी में मिल मीठा हो जाऊं
लोगों को जीवन दे जाऊं
समुद्र में खारा हो जाऊं
बन नमक खाने का स्वाद बढ़ाऊं
मुझे ना दूषित करो तुम
स्वच्छ नीर ना होगा तो
जीवित कैसे रह पाओगे
हां मैं पानी हूं
मेरा मोल समझ पाओगे
एक एक बूंद को तरस जाओगे।।
दिल की कलम
मधु अरोड़ा

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