मै जितना खुश करना चाहूँ।
तुम उतना ही रूठते हो। 
मै जितना झुकी नज़र से बात करूँ। 
उतना ही दिल दुखाते हो। 

तड़प कर रह जाती हर बार। 
आँखे भी छलक आती है।
लेकिन तुम इतने बेदर्दी। 
तुम्हे मेरी उलझन समझ नही आती है। 

क्या मैं इतनी पराई हूँ। 
तुम्हारी परछाई भी ना बन सकीं ।
रहते दूर दूर तुम। 
आखिर क्यों नहीं तुम्हारी समाई बन सकी।

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
            दिल्ली