पुराने हो चुके खत,
ढल चुके, खत के जमाने!
पर तुम बिल्कुल नये हो,
आज भी पहले की तरह!!
जो सुकून था तेरा खत पढ़कर,
वही सुकून है आज भी,
तेरे पनाहों में आकर!!
घंटों बातें करने की वो आदत!!
जैसी हो वैसी ही रहना, अक्सर,
मुझे कहते हो तुम, पर मैं,
कहती हूँ तुमसे, जाना कभी,
ना बदलना तुम!!
पुराने खत की तरह कितनी भी,
पुराने हो जाए हम दोनों,
पर मुहब्बत अपनी,
ऐसे ही चलती रहें!!
वो आखिरी खत आज भी,
सम्हाले हैं हम तो,
जिसमें अब ना मिलने की,
कसम खाई थी, और,
उसी कसम की कसम में,
तुम साहिल बन गए सदा के लिए!!
श्वेता कर्ण

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