एक बार मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि अगर मैं तुम्हें कहूँ कि तुम किसी को साथ लेकर फिल्म के लिए और डिनर पर जाओ तो तुम क्या समझोगे। मैंने कहा कि  मैं यही समझूँगा कि अब तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो। तो वो बोली कि मैं तुमसे प्यार करतीं हूँ लेकिन एक और औरत भी है जो तुमसे बहुत ही प्यार करती है और वो है तुम्हारी माँ। तुम उन्हें बाहर घूमने लेकर जाओ। यह उनके लिए बहुत ही प्यार सा अनुभव होगा। 


दरसल मेरी माँ मुझसे अलग और अकेले रहतीं थीं। और समय की व्यवस्ता के कारण मै उनसे मिलने नही जा पाता था। 
मैंने उन्हें उस दिन रात को फोन करके बाहर डिनर करने और फिल्म देखने के लिए कहा।तो वो बोलीं क्या बात है? तुम दोनों में सब ठीक तो है न! 
मेरी माँ एक बहुत ही शक्की स्वभाव की औरत थीं। 
तो मैंने कहा कि ऐसी कोई भी बात नहीं है।मै आपके साथ बाहर जाना चाहता हूँ ताकि मै आपके साथ कुछ समय बिता सकूँ। यह मेरे लिए एक सुखद एहसास होगा।और सिर्फ हम दोनों ही जाएगें। मेरी माँ ने कुछ सोचा और कहा ठीक है।  


शुक्रवार शाम को जब मैं माँ के घर पहुंचा तो वो एक बहुत ही सुंदर पोशाक पहने तैयार थीं। वो काफी खुश नज़र आ रहीं थी। 
उन्होंने मुझे कहा कि मैंने अपनी सहेलियों से भी कहा है कि आज मैं अपने बेटे के साथ घूमनें जा रहीं हूँ। माँ ने कहा कि तुम्हें पता है वो तुमसे बहुत ही प्रभावित हुईं। 
हम एक बहुत ही अच्छे और आरामदायक रेस्टोरेंट में पहुंचे।वहाँ पहुँच कर बैठने के बाद मैंने एक मेनू उठाया और खाने के आर्डर के लिए पढ़ना शुरू किया। मैंने बीच में देखा माँ के उदास होठों पे मुस्कान थी। वह भी मुझे देख रहीं थीं। और फिर बोलीं पता है जब तुम छोटे थे और  खाने के आर्डर के लिए मैं मेनू देखती थी।
लेकिन आज मैं इसे आपके लिए देख रहा हूँ। मैंने मुस्कुराते हुए कहा। खाने के दोरान हम दोनों आपस में बाते करते रहे एक दूसरे के बारे मे

बातों करते वक्त हमें यह भी न पता चला कि फिल्म का वक्त भी निकल गया था।खाना खा कर उठने के बाद पेमेंट करके हम बाहर आए। 
रास्ते में माँ ने कहा कि अगली बार पेमेंट मैं करूँगी। तो मैंने कहा कि पेमेंट कोई भी करे इससे क्या फर्क पड़ता है। तो माँ ने कहा नहीं पेमेंट मैं ही करूँगी। 
माँ को उनके घर छोड़कर मैं अपने घर पहुँचा।तो 
पत्नी ने कहा कैसा रहा आज का प्रोग्राम। जैसे सोचा था वैसे ही था ना?तो मैंने कहा कि नहीं उससे भी बढिया। 
उसके कुछ दिन बाद मेरी माँ का दिल का दौरा पड़ने पर निधन हो गया। यह सब इतना जल्दी हुआ कि मुझे पता भी नहीं चला।बाद में मुझे माँ के बिस्तर पर एक खत पडा़ हुआ मिला।और उस खत में लिखा था कि बेटा मैंने तुमसे कहा था न कि अगली बार बिल का पेमेंट मैं ही करूँगी।तो मैंने होटल के बिल का पेमेंट एडवांस में ही कर दिया है। मै एक बूढ़ी औरत। मुझे मेरी जिंदगी का क्या पता। उस दिन का तुम्हारे साथ बाहर जाने का अनुभव मेरी जिंदगी का सबसे सुखद अनुभवों में से था। अगली बार अगर मैं न जा पाऊँ तो तुम अपनी पत्नी के साथ खाना खाने जाना।तुम मेरे लिए दुनिया के सबसे अच्छे बेटे हो। 
माँ के इस खत को पढ़ने के बाद मैं रो पड़ा। और उस दिन मैंने एक माँ और बच्चे के अनुभव को गहराई से समझा।।।



     🌱🌱मनु ✍🏻