में सबला हूं संस्कारी हूं वक्त पड़े चिंगारी हूं।
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मैं  नारी हूं  बेशक  लेकिन जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।
नाते रिश्ते सब है मुझसे।,मैं रिश्तों कि फुलवारी हूं।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

मैं मैया की अभिलाषा हूं।, पापा की प्यार की भाषा हूं।
निज बहना की हूं मान शान, भैया की  बहन  दुलारी हूं।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

मैं दो दो कुल की  मान  हूं ,निज राष्ट्र की गौरव शान हूं।
कर्तव्य से नहीं विमुख होती, मैं कोमल हूं,  सुकुमारी हूं ।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं

मुझसे ही सजता गीत अधर, मुझसे ही मुरली बजे मधुर ।
मैं रीत रिवाज़ की अनुगामी ,में रही नहीं अहंकारी हूं।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

जग रौशन करती ज्योति हूं, मैं  वेद पुराण की  पोथी हूं।
अस्तित्व पड़े जब खतरा में, बनती  तलवार दो धारी हूं।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

 मैं पावन गंग पुनीता हूं, में सजना की परिणीता हूं।
मैं पत्नी भी संस्कारी हूं, जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

कांधे से कांध मिला चलती, हर क्षेत्र में धाक जमा चलती।
में अबला नहीं लाचारी हूं, जब वक्त पड़े चिंगारी हूं।

मैं  सारे फ़र्ज़  निभाती हूं, दो कुल का मान बढ़ाती हूं।
परिवार की अपने धूरी हूं ,में शिक्षित और संस्कारी हूं।

जब वक्त पड़े चिंगारी हूं

जाने  कितने  हैं नाम  मेरे हर नाम से जानी जाती हूं।
हर क्षेत्र में परचम लहराकर ,पुरुषों का  दंभ  मिटाती हूं।

मैं  राधा  हूं मैं  मीरा हूं ,में सावित्री अनसूया हूं

जब श्याम अधर लग जाती हूं ,परिणीता प्रेम पुजारी हूं।
जब वक्त पड़े चिंगारी हूं ,हैं मैं मै जननी मैं नारी हूं।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश