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बिन जाने बिन समझे किसी का,
यूँ ही ना अपमान करो।
किसने झेली कितनी पीड़ा,
इसका जरा तुम ज्ञान करो।
मुस्काते चेहरों के पीछे ,
दर्द हजारों होते हैं।
होंठों पर मुस्कान लिए,
दिल ही दिल में रोते हैं।
किसी के भोलेपन का तुम ,
कभी मज़ाक उड़ाओ ना।
लालच,स्वार्थ,कपटता का,
यूँ ही इल्ज़ाम लगाओ ना।
देख आँख में नमी किसी के,
अनदेखा करके जाओ ना।
रख कन्धे पर हाथ ज़रा ,
दर्द किसी के बटा देना।
बनकर शकुनि ,दुर्योधन,
हस्ती अपनी मिटाओ ना।
मानव हो मानवता का,
यूँ उपहास उड़ाओ ना।
देनी पड़ती है अग्निपरीक्षा,
सदा सत्य के राही को।
न्याय मिले कलयुग में कैसे,
बोलो बेगुनाही को।
महल झूठ के टिकते नहीं,
टिकती नहीं कभी मक्कारी।
अपने कर्मों के फल पाने की,
आती है एकदिन बारी।
जिसका डोला ईमान यहाँ,
निंदिया चैन की पाए ना।
गिर जाए जो नजरों से ,
सम्मान कभी वो पाए ना।
माना दुनियाँ से तू अपने,
सारे पाप छिपाओगे,
लेकिन अपने आप से ,
बोलो कैसे बच पाओगे।
माना आज है तेरी बारी,
एकदिन मेरी भी आएगी।
दुःखों के अँधेरे मिट जाएंगे,
जीवन में खुशियाँ आएँगी।
अमर नहीं है कुछ भी यहाँ,
इसका सदा तुम ध्यान करो।
त्याग दुर्व्यसन दुर्गण सारे,
ईश्वर का गुणगान करो।
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सपना (स.अ.)
जनपद-औरैया

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