ह्रदय में उमड़ते जज्बात को
एक आकार दे देती हूँ
मैं कुछ इस तरह कविता कह देती हूँ
न समझूँ मैं रस-अलंकार
न छंदों से गहरा नाता है
मुझे तो ह्रदय के भावों को
शब्दों से सजाना आता है
ह्रदय के भावों को क्रम से सजा देती हूँ
मैं कुछ इस तरह कविता कह देती हूँ
होता अंतर्मन जब उद्वेलित
बेचैनी से घिर जाती हूँ
मन की अकुलाहट के बीच
कोई राह नहीं पाती हूँ
आवेगों के भंवर में फँसती हूँ
संवेगों को संभालते हुए शब्द गढ़ देती हूँ
मैं कुछ इस तरह कविता कह देती हूँ
देखती हूँ जब आसपास
कोई अत्याचार या अनाचार
अनैतिकता या क्रूरता से
भरा कोई कृत्य या आचरण
तब ह्रदय के दर्द को सकारात्मकता
का आवरण चढ़ा एक सन्देश दे देती हूँ
मैं कुछ इस तरह कविता कह देती हूँ।।
💐💐आप सभी को कविता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💐💐
आशा झा सखी

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