भोर की पहली किरण है नारी
साँझ की लालिमा भी है नारी
मत करो मैला हमें
ज्वलन्त हो गये गर हम
तो आहट भी न होगी और
महसूस करोगे की जल गए तुम
वो ख्वाब जो तुम्हारी माँ ने देखे
तुमको पहली बार हाथों में लेकर
राख हो जाएंगे तुम्हारी नादानी की आग में
अभी समझ गए तो
स्वर्णिम इतिहास बनेगा
नहीं तो ध्वस्त हो जाएगा
सामाज तुम्हारे कुविचारों से
हो सभी की ये तैयारी
स्वस्थ, सक्षम, सुरक्षित रहे नारी
अंजू

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