आज मेरी मम्मा ने मेरे लिए खाना भेजा ।
जिसमें मेरी पसंदीदा कढ़ी भी शामिल थी ।
हर निवाले में यूं लग रहा था, मम्मा का प्यार घुलता जा रहा हो जैसे , उनकी ममता में सराबोर ,हर निवाले में स्वाद दोगुना बढ़ रहा हो जैसे , एक अजीब सी खुशी, और बड़ा सुकून मिल रहा हो जैसे, 
कहीं पेट की भूख के साथ, मन की भूख की तृप्ति हो रही हो जैसे,
और हर निवाले के साथ ,मम्मा की याद रह रह कर बढ़ रही हो जैसे,
इस दुनिया में मां की सूरत से सुंदर कोई रचना नहीं ।
ये निस्वार्थ प्रेम और समर्पण शायद कहीं और नहीं।।

आपकी बहुत याद आ रही है मां

 😓.......



✍️ ऋतु बाजपेई 🌅🙏