मन उदास है।

कहीं यादों की सिलवटें
रह रहकर चुभ रहीं हैं,
अल्फाजों की स्याही भी
कुछ जम सी गयीं हैं।
ख्वाबों में खोई आँखें
बाँध बनने के प्रयास में हैं।।

शबनम से कलियाँ भी
झुलस झुलस रही हैं ,
खुशियों की धारा
कुछ गुम सी गयीं हैं।
झुलसे पंख पाखी
क्षितिज पाने के प्रयास में है।।

सब कुछ पास है
फिर भी तन्हाई का अहसास,
फूलों से बिसर गया
जैसे कोई सुवास।
सिसकते अहसासों को दिल
सुलाने के कयास में है ।।

                           देवयानी भारद्वाज