मैं जिंदगी के बंद दरवाजे को निहारती 
निहारती थक गई.... 
मैं किसी का इंतजार करते करते
थक गई.... 
कि कोई आए और खोले इस दरवाजे
को अब तो... 
फिर मन में ख्याल आया कि क्यों मैं किसी 
की मोहताज बनूँ... 
क्यों मैं किसी के लिए आने का इंतजार 
करूँ... 
क्यों मैं किसी की झूठी आस रखूं... 
मैं खुद ही उठी और खुद ही खोल दिया
उस बंद दरवाजे को...
और देखा तो चमक रहा था मेरा
अस्तित्व... 
एक नए स्वावलंबन से...! 

    💐मनु ✍🏻