संस्कृति है रग रग में।
बलिदान करती मैं पग पग में।
मैं शीतलता का आधार हूँ।
मैं आज की भारतीय नार हूँ।
गृहस्थी सम्भाल बनी गृहणी।
भारत माता की मैं हूँ ऋणी।
मैं अनेकों मैं एक किरदार हूँ।
मैं आज की भारतीय नार हूँ।
वीर जो सरहद पर जाते है।
रक्षा मेरी करने की खातिर।
अपना आशीर्वाद मैं उन पर वार दूँ।
मैं आज की भारतीय नार हूँ।
सीता बन ना जलू आग में।
मीरा बन ना पीयू ज़हर ।
असहाय अब नहीं मैं कमजोर हूँ।
मैं आज की भारतीय नार हूँ ।
दुश्मनों से लड़ जाए जो।
मेरी तरफ जो आँख दिखाए।
नोच के रख दे ऐसा करती मैं संहार हूँ।
मैं आज की भारतीय नार हूँ।
आत्मशक्ति बन अपनी मैं।
लड़ लडाई अपनी खुद।
बढ़ाती क़दम अपने सपनों पर हूँ।
मैं एक आज की भारतीय नार हूँ।
नीलम गुप्ता 🌹🌹( नजरिया )🌹🌹
दिल्ली

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