ज़िन्दगी को सवार ना सके अपनी उसको हमने पन्नों पर सजा रखा है
अपनी आँखो से गिरते हुए हर आँसू के दर्द को इस पर समेट रखा है
सर्द भरी रातो में उठ उठकर तेरी यादो को पिरो रखा है
तेरी झूठी कसमो से इस दिल को आज भी हमने जागा रखा है
अपने हर रिश्ते नाते को भुला दिए था हमने तेरी मुहब्बत में
तेरे ही चाहत में इतने घोखे हमने खाएं रखे है
खुद की मुहब्बत पर से ही बैर अब रखने लगे है
पहले तेरी बातो को सुनकर इस दिल को करार आ जाया करता था
अब तो तेरी ख्यालों से ही इस धड़कते हुए दिल की सांसे थम सी जाती है
आलिया खान ✍️

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