क्या कहा
फांसी
किसे
किस किस को
दोषी आखिर कौन नहीं है
उफ़
कितना चीखी थी उस दिन
कितना चिल्लाई थी
किस किस को नहीं पुकारा था
क्या तुमने नहीं सुनी थी मेरी चीख
क्या तुम दोषी नहीं हो
क्या वह नहीं
अरे हां याद करो
तुम्हीं तो थे न
हां तुम्हीं तो थे उस समय
जब वह भूखे भेड़िए मेरी बोटियां नौंच रहे थे
और तुमने अनदेखा कर 
अपनी गाड़ी की रफ़्तार तेज़ कर दी थी
और तुम 
तुम
कैसे वापस उल्टे पांव भागे थे 
हा हा हा हा हा हा हा
याद है ना तुम्हें
ओह........
मम्मी मम्मी वहां कोई चिल्ला रहा है
बच्चे की इस मासूमियत पर झिड़कियों के साथ
खिड़कियों का बन्द होना
मुझे आज भी याद है
कितना चीखी थी 
कितना तड़पी थी
तब नहीं 
तो फिर आज यह बेकार का विधवा प्रलाप क्यों
फिर फांसी की मांग
किसके लिये
स्वयं अपने लिये
रहने दीजिए साहब 
गला थक जायेगा
क्यों जंगल में दहाड़ लगाते हैं
आज यह मोमबत्ती जलाने भर से क्या मिलेगा
उसने तो मेरे ऊपर पूरी होली ही जला दी थी
रहने दीजिए साहब
नहीं चाहिए हम बेटियों को
झूठी हमदर्दी 
हम बेटी कभी निर्भया 
तो कभी प्रियंका 
और न जाने कितने ही नामों से दुनिया में आती रहेंगी
और कभी पति
कभी भाई 
तो कभी पिता ,दादा, गुरु 
और न जाने कितने ही रुपों द्वारा
रौंदी जाती रहेंगी
चाहे सतयुग रहा हो
चाहे त्रेतायुग
फिर चाहे द्वापरयुग
नाम बदले पर
मेरी कहानी कभी नहीं बदली
और न ही
वह  कभी बदलेगी
विडम्बना है
अदालत के समक्ष
अपनी सत्यता प्रकट करने के लिए तुम
मेरी सौगन्ध तो उठाते हो
पर नहीं उठाते हो तो बस 
अपनी नज़र में स्थान मेरा
क्योंकि ईश्वर ने मुझे भोग्या जो बनाया है
तुम्हारे लिए
हे द्रोपदी उठो 
तुम्हें अपने बल को पहचानना होगा
तुम्हें स्वयं अपने चीर का रक्षक बनना होगा
अब कोई गोविन्द तुम्हारा चीर बढ़ाने नहीं आयेगा।।
 नहीं आयेगा 😢😪😢
                                          

                देवयानी भारद्वाज