एक व्यक्ति विशेष 
क्या अब देश हो गया है ?
गिरती अर्थव्यवस्था
बढ़ती बेरोजगारी पे बात क्या होनी
सरकार से सवाल पूछना भी
अब तो देशद्रोह हो गया है
एक व्यक्ति विशेष 
क्या अब देश हो गया है ?

GST, नोटबन्दी से व्यापारी डूबे
लॉकडाउन से टूटी मजदूरों की रीढ़
पर कुछ की आय दर साल दूनी हो रही 
ये कैसी जुगत, ये कैसा कमाल 
क्या है जो अमीरों संग विशेष हो गया है
एक व्यक्ति विशेष 
क्या अब देश हो गया है ?

शाहीन बाग/ जे.एन. यू वाले आतंकी
यूनिवर्सिटी आतंकवाद का गढ़
बेरोजगार उपद्रवी
अब तो अन्नदाता भी 
आतंकवादी/खालिस्तानी बोले जा रहे हैं
बाकी बचा क्या
कौन अब शेष रह गया है
एक व्यक्ति विशेष 
क्या अब देश हो गया है ?

हर आंदोलन में आतंकी कनेक्शन ढूढ़े जाते
हर आंदोलनकारी जहाँ आतंकी बोले जाते
सच बोलने वालों के मुँह पे ताले डाल
जहाँ रट्टू तोते पाले जाते
जोड़ तोड़ से चलती सत्ता जिसकी
उस देश के मालिक अब बस
'अयोध्या नरेश' ही हैं

ये कुर्सी का मोह
सत्ता का अहंकार
या फिर सोने भरी तिजोरियां
सब यहीं रह जाना है
ऊपर ये सब ले जाना 
कब का ही निषेध हो गया है
एक व्यक्ति विशेष 
क्या अब देश हो गया है ?...
    
               ---दीपक कुमार