सुना है,दिल की दीवार को ऊँचा,
कर लिया उन्होंने!
एक मैं जिद्दी परिंदे सा, सर ,
टकरा रही!!
वो दिल के मामले में जरा,
मजबूत से हैं!
इक मैं पागल, जानबूझ कर,
चोट खा रही!!
उनके दिल के तहखाने में,
दबी कुछ यादें पुरानी!!
मैं बेकार में, अनुभूति अपनी,
दिला रही!!
इक मन करता, कदम वापस,
कर लूँ!
लेकिन, बरबस ही, कदम आगे,
बढ़ा रही,
कदम आगे बढ़ा रही!!
श्वेता कर्ण!

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