आगमन की शुभ ये घड़ी
लगी अभिवादन की झड़ी
पारितोषिक की लाइन बड़ी
दर्शकों की जिज्ञासा है बढ़ी
             
फागुन की आई रे घड़ी
बजालो चंग छड़ी रे छड़ी
माता के दरबार में सजी
कवियों की देखो लड़ी रे लड़ी
फागुन की आई रे घड़ी,,,,
बजालो चंग,,,,
श्रोताओं में आस है जगी
सुनाउँ में भी खड़ी रे खड़ी
फागुन,,,,
बजालो,,,,
थाली में भोग है  भरी
परोसा देखा खड़ी रे खड़ी
फागुन,,,,
बजालो,,,,
आया है  होली का त्यौहार
जिमावे तुमको कर मनवार
फागुन,,,,
बजालो,,,,
पिचकारी रंगों  सी भरी
कवियों ने देखो काव्य में भरी
फागुन,,,
बजालो,,,,
होली पर मिलन घड़ी
मनालो होली घड़ी रे घड़ी फागुन की,,,,,
बजालो,,,,,
संध्या पंवार राजस्थान