मेरे दिल का खिलौना।
उदास बैठा हैं।
चाहत तेरी में ।
आघात हुए बैठा है।
चाहता है जिंदगी भर जाए रंगों से।
फाल्गुन की मदहोश बायर में।
कहकशाँ उम्र की दहलीज।
छोड़ना नहीं चाहता है।
मेरे दिल का खिलौना।
उदास बैठा है।
चाहता है चिड़िया की तरह चहकना।
इन हसी सुबह की बेला में।
लेकिन आलसी कही का
चलकर उड़ान भरना नहीं चाहता है।
मेरे दिल का खिलौना ।
उदास हुए बैठा है।
चाहता है गाऊँ कोई गीत ।
नया सा बन जाए जीवन।
इन संगीतमय जिंदगी की तरन्नुम में
लेकिन शर्म के पर्दे में खुद को छिपाए बैठा है।
मेरे दिल का खिलौना ।
उदास हुए बैठा है।
चाहता है मै थिरकु।
किसी नयी रीदम पर।
जैसे इन उठती सागर की लहरों मे।
दुनिया की लोक लाज का पहरा लगाएं बैठा है।
मेरे दिल का खिलौना ।
उदास हुए बैठा है ।
चाहता है जी भरके ।
तुम पर प्यार लुटाऊँ।
इस सतरंगी सपने सुनहरे में।
लेकिन खुद पर ही गुस्सा खाऐ बैठा है।
मेरे दिल का खिलौना।
उदास हुए बैठा है।
तेरी चाहत में।
आघात हुए बैठा है।
नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
दिल्ली

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