हवाओ ने बिखेरी गुलाल
उड़ा कर आसमान में धूल,
कर धरती पर बरसात रंगों की
बिछ गये है, केसू के फूल
सखी सहेलियां एक सुर में बोली
आ गई होली, आ गई होली.....
भूल गए हैं बैर भाव
नफरत को फेंक, आग में
एक रंग में रंग गए सभी
प्यार भरी मनुहार में,
खिंच डोर प्रेम की,
बन्द गांठे बरसो की खोली
आ गई होली, आ गई होली....
लाल,पीला, नीला, हरा और
गुलाबी रंग, सजालो थाली में
जो नशा रंगों में है, नही है
मदिरा की प्याली में
एक संग, एक मन,
एक रंग कर सभी ने
राह प्रेम की खोली
आ गई होली,आ गई होली....
रंग जीवन मे रस लाते हैं।
रंग सिखाते हैं प्रेम की भाषा
रंग से जीवन रंगीला
रंग ही जीवन की मधुशाला
बढा कर आपस मे भाईचारा
रिश्तों में मिसरी घोली।
आ गई होली, आ गई होली.....
यो तो खेलते आये हम
कई रंगों के रंग से
तीन रंगों का तिरंगा भी,
लिपट जाता है आखिरी जंग में,
रंग जाऊंगा मैं भी,
अपने ही रंग में
खाकर सीने पर गोली
आ गई होली, आ गई होली...
श्यामा सोलंकी

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