मेरी दीदी है " मीनाक्षी", 
वो तो है, सबसे अच्छी! 
वीरता से भरी हुई वो, 
वीर रस ही है लिखती! 

बच्चों की है आदर्श मम्मा, 
बड़ों की भी आज्ञाकारी है! 
जो गलियाँ शरहद तक जाती, 
उन गलियों में फूल बिछाती ! 

झाँसी की वो रहने वाली, 
तेज ओज से भरी हुई!
खुद को मैं खुश किस्मत समझूँ, 
ऐसी दीदी है मुझे मिली! 

दीदी तुम मेरे लिए उपहार, 
हो ईश्वर की! सदा अपनी, 
आशीष में मुझे रखना! 
दीदी तुम दूर सही पर, 
मुझे याद में हरदम रखना! 


श्वेता कर्ण!