ये समय का दौर, आया कैसा,
कारवां वो, गुज़रता चला गया,
वो लम्हें वो, खुशियों के पल,
जो ज़हन में, बस गये हैं मेरे,
भुलायी नहीं, जा सकतीं कभी,
यादें उनकी, यादों का सिलसिला,
महीना है ये, सावन-भादों का,
आती याद मुझे, मेरे अपनों की,
माँ -पापा हमारे, अपने वो मेरे,
याद बहुत आते, भाई वो मेरे,
बहिन- भाभी को, कैसे भूलूं मैं,
हँसी ठिठोली वो, कैसे भूलूं मैं,
याद मुझे बहुत, आती है उनकी,
सावन के झूले, और मौज मस्ती,
बहुत सताया है, कोरोना ने,
समय ही ऐसा, जो आया है,
पीहर तो जायें, हम अब कैसे,
भुले अब नहीं, भूलेगा मंज़र,
ये समय का दौर, आया है कैसा,
कारवाँ गुज़रता, ही चला गया ।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर (म. प्र.)
नोट -
(कोरोना के समय रक्षाबंधन पर आती अपनों
की याद पर लिखी गयी रचना)

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