हाँ मैं बेरोजगार हूँ
मम्मी पापा का सपना
बहन की राखी
बीबी की चूड़ी
बच्चों के खिलौनों का
कर्जदार हूँ
हाँ मैं बेरोजगार हूँ...
मैं जीने को यूँ भी करता हूँ
दिन रात तिल तिल मरता हूँ
बहन का दहेज
भाई की पढ़ाई
दादा दादी की दवाई
की दरकार हूँ
हाँ मैं बेरोजगार हूँ...
पापा की टूटती आस
मम्मी के सपनों का आकाश
बहन की राखी का वादा
भाई का विस्वास
जर्जर इस कश्ती की
मैं पतवार हूँ
हाँ मैं बेरोजगार हूँ...
पर शायद तुम यह भूल गए
मैं ही जनता
मैं ही सरकार
मैं हर जन के आह से
निकली हुंकार हूँ
हाँ मैं बेरोजगार हूँ...
-दीपक कुमार

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