खुशी को तलाश करने को क्यों दिलों जान एक अपना करते हो । 
खुशी तो तुम्हारे अंदर है क्यों उसे बाहर तलाश करते हो।

 जाकर पूछो चमन के फूलों से घेरा है जिनको कांटो ने , 
फिर भी वह खुशी से खिलते हैं अपनी खुशबू बिखेरते रहते हैं। 

देखो राहों में खड़े उन शजरो को  सालो साल जो खड़े  रहते है। 
धूप से झुलसते मुसाफिर को ठंडी छाया सुकून देते हैं। 

जरा सोचो तुम नदिया के बारे में ऊंचे पहाड़ों से जो निकलती है । 
हंस के  सारी बाधाओं को पार करके सागर से फिर वह मिलती है।  

कुछ तो  हौसला रखो तुम खुद में तुम क्यों हिम्मत हार जाते हो। 
मन में उमंग थोड़ी सी भर लो तो एक दिन आसमान को छू लोगे। 

खुशियां बिखर रही है चारों तरफ
अपने दामन में बांध के रखना। 
बेवजह छोटी-छोटी दुनिया की बातों में
अपनी खुशियों को न रुखसत होने देना। 

             उषा जैन कोलकाता