ख्वाबो की दुनियां है ये
सोचो और देखो तो 
क्या है ख्वाब
एक अप्राप्त  लालसा 
एक  भावना एक स्वप्न 
जो सोचा वो ख्वाब 
बन गया 
ख्वाब को पूरा करे
कर्म ,मेहनत और
परिश्रम से
ना रहे कोई स्वप्न अधूरा
ना रहे कोई ख्वाब अधूरा
एक से एक कड़ी जुड़े 
बन जाये हर स्वप्न पूरा
हो सके तो सोच मंजिल
पा सके तो लक्ष्य मंजिल ख्वाब ही पूरा हुआ तो
ख्वाब का अस्तित्व क्या
कर्म और धर्म पथ पर
ख्वाब को हकीकत मिले
साथ हो कोई जहाँ में
एक मंजिल सबको मिले



संध्या पंवार राजस्थान