देखो होली जल रही है,
धरा से अंबर बढ़ रही हैं,
देखो होली...

जल रही धू-धू कर होली,
 राख बन अंगार सी होली,
देखो होली-

देखो होली जल रही है,
एक संदेशा दे रही है,
देखो होली-

कितना कुछ वो कह रही है,
देखो होली जल रही है,
देखो होली-

ठीक से बड़े ध्यान से देखो,
एक नहीं कई बार से देखो,
देखो होली-

है समाहित दिव्य शक्ति,
अग्नि का वरदान सा भक्ति,
देखो होली-

बैठे हैं प्रहलाद इसमें,
बेठी बुआ होलिका भी इसमें,
देखो होली-

बैठा है एक काल भी इसमें,
है बड़ा विकराल भी इसमें,
देखो होली-

क्या सुना क्या है वो बोली,
देखो होली चल रही है,
देखो होली-

कह रहे सब अटकी की चटकी,
तोड़ मरोड़ होलिका का पौधा,
देखो होली-

देखो आंधी जल रही है,
ज्वाला की और बढ़ रही है,
देखो होली-

जल रही जलती रहेगी,
राख होकर धधकती रहेगी,
देखो होली-

परंपरा नित वर्ष फल रही,
धीरे-धीरे चलती चल रही,
देखो होली-

रंग में रंग को ढल रही,
कितना कुछ चुपचाप कह रही,
देखो होली-

देखो होली जल रही है,
धरा से अंबर बढ़ रही है,
देखो होली-

✍️लक्ष्मीनारायण
 दिल की कलम से-

देवरी कलां जिला सागर।
मध्य प्रदेश...