पानी बहती धारा है, जग में इससे उजियारा है,
पानी के सौ रंग बदल दो,इसका रंग निराला है, 
बेरंग होकर भी इसका अस्तित्व मतवाला है,
 कभी अमृत बन  जाता,कभी विष का प्याला है, 
नदियों में बहता मीठा पानी, लोगों की प्यास बुझाता है, सागर का खारा पानी नमक में परिवर्तित हो जाता है, संसार को यह पोषण देता भोजन में स्वाद बढ़ाता है, कभी यह अमृत बन जाता, कभी यह विश बन जाता है 
पानी बहती धारा है जग में इससे उजियारा है।



                     संगीता वर्मा