स्त्री की गरिमा का मान हूँ 
एक स्त्री हूँ मैं, 

दीपक की रोशनी हूँ मैं, 
प्रकाश हूँ मैं, 

ममत्व की पहचान हूँ मैं, 
जीवन दायी हूँ मैं, 

जीवन की अभिलाषा हूँ मैं, 
मुस्कान हूँ मैं, 

मान भी हूँ, सम्मान भी हूँ मैं,
अभिमान हूँ मैं, 

व्यक्तित्व की पहचान हूँ मैं, 
स्त्री हूँ मैं, 

दायित्वों का निर्वहन हूँ मैं, 
घर की मर्यादा हूँ मैं, 

समाज का अभिमान हूँ मैं,
स्वाभिमान हूँ मैं, 

संस्कृति का गौरव  हूँ मैं, 
संस्कार हूँ मैं, 

शक्ति -भक्ति स्वरुपा हूँ मैं, 
निश्छलता हूँ मैं, 

जीने की राह दिखाती हूँ मैं,
जीवन की प्रेरणा हूँ मैं, 

सहनशीलता की पराकाष्ठा हूँ मैं, 
मन की थाह हूँ मैं, 

हर सुख दुख की साथी हूँ मैं, 
दया की भावना हूँ मैं, 

भूल से गर दिल दुखाती हूँ मैं, 
क्षमा प्राथी हूँ मैं, 

अपने घर की गृह मंत्री हूँ मैं, 
साथ निभाती हूँ मैं, 

अनन्त भावों का भंडार हूँ मैं, 
करुणा का सागर हूँ मैं, 

अबला और असहाय नहीं हूँ मैं, 
निर्बल नहीं हूँ मैं, 

ईश्वर का दिया वरदान हूँ मैं, 
विधी का  विधान हूँ मैं, 

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  काव्य रचना -रजनी कटारे 
       जबलपुर (म. प्र.)