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🐤🐦🐤🐤🐦🐤🐦🐤🐦🐤🐦🐤🐦🐤🐦🐤शाम के 5:00 बजे थे, मैं गार्डन में टहल रही थी, दूर से दबी हुई आवाज आ रही थी ची, ची, ची -
थोड़ा सा अंधेरा हो चला था, मैंने इधर देखा उधर देखा कुछ पता नहीं चला था, मन बड़ा व्याकुल हो चला था,
बार-बार यह आवाज कैसी आ रही है, मैं जरा गार्डन से बाहर निकल कर आई मैंने इधर उधर अपनी नजरें घुमाई,छोटा सा प्यारा सा चिड़िया का बच्चा बीच रोड पर पड़ा था, अभी तो वह बहुत छोटा था, उड़ भी नहीं पा रहा था,वह बहुत लाचार था मैंने उसे उठाया मैं उसे अपने घर ले आई, अब रात हो चली थी मेरी बिटिया चिड़िया के बच्चे को देखकर बहुत खुश हो रही थी, उसको पानी पिलाया दाना खिलाया फिर उसको सावधानीपूर्वक सुलाया ,जब सुबह हो गई मेरी उस दिन सुबह 5:00 बजे ही आंख खुल गई, उठते ही सबसे पहले मैं चिड़िया के बच्चे के पास गई, मैंने अपने घर का मेन डोर खोला, बच्चे को बाहर लेकर गई क्या देखती हूं चिड़िया ने अपने बच्चे को पहचाना, और वह उसके पास आई,यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा, मैं चुप बैठी देखती रही बच्चा बहुत छोटा था ,थोड़ा -थोड़ा सा उड़ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे कि उसकी मां उसको उड़ाना चाहती हो और वह अपने मकसद में कामयाब भी हुई, मैं सब चुप देखती रही थी और चिड़िया अपने बच्चे को उड़ा कर ले गई,
मुझे यह देख कर बहुत अच्छा लगा लेकिन यह सब देखकर मेरे मन में एक बात आई, उन पक्षियों की भी जिंदगी होती है, जैसे एक मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है ऐसे ही जानवर पशु पक्षी सब में अपने बच्चों के प्रति भावनाएं होती है, जो हम मानव जाति में ज्ञान होता है वह पशु पक्षी में भी होता है।
⚘ संगीता वर्मा⚘

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