दर्पण कभी तो तुम मन रख लिया कर
 उम्र 58 थोड़ी कम ही बता दिया कर
  माना उम्र एक संख्या है 
  जीना एक खुश जिंदगी है 
  हंसकर खिलखिला कर 
  कुछ दूसरे की सुनकर 
  कुछ अपनी सुना कर बिता दिया कर
   उम्र है 58 थोड़ी कम बता दिया कर 
   माना तू झूठ नहीं बोलता 
   सब की सच्चाई के राज है तू खुलता 
   जो जैसा है वैसा ही है तो बोलता 
   सज संवर कर निहारु तुझे तो
    हंस कर तू यह बोलता
     राजना छुप पायेगा
      थोड़े बनाव सिंगार से 
      भेद दिलों के खोलता
       तभी तो कहते हैं 
       कि दर्पण झूठ नहीं बोलता।।
                     दिल की कलम से


                      मधु अरोड़ा