थोडी सी भावनावों
की आहुति डाल दी,
थोडे से यादों के
मोती पिरो दिये,
थोडा सा जीवन का
ताना बाना बुन लिया,
एक अंजुली भर जीवन
के रँग चुरा लायी,
यादों के झंझावत को
झकझोर कर
टेसू के फूल
बीन लायी,
लिये शब्दों के
भरमार,
जब बुत खड़ा किया
तो पाया
वो एक कविता थी।
---डॉली मिश्रा✍️

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