कोई शब्दों का जादूगर है
जो शब्दों का प्रयोग
बेहद खूबसूरती
और चमत्कृत ढंग से करता है
तब कोई है
एक कुशल खिलाड़ी
जो कहता है
शब्दों से खेलना तो मेरा शौक है जनाब
और कोई है
शब्दों का बादशाह
जो शब्दों को रखता है
गुलामों की तरहा अपनी कैद में
फिर जैसा चाहता है
बैसा ही चलाता है उन्हें
मगर साहेब
मेरे लिए तो शब्द साक्षात ब्रह्म है
और मैं हूँ
शब्दब्रह्म की उपासक
और सतत् उपासना में ही
सुख शांति की अनुभूति होती है ।
देवयानी भारद्वाज

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