यूँ पूछा किसी ने
एक औरत 
होलिका
जली या जलाई गई
पर क्या औरत थी
वह
क्या ममता 
करुणा
दया
त्याग 
समर्पण जैसे गुण थे उसमें
नहीं न
जो धन
वैभव
ताकत के बल से
प्रसन्नता की शत्रु हो
वह नारी कैसे हो सकती है
यदि दैत्यों के लक्षण रखती थी
तो फिर 
तो
वह जले 
या जला दी जाय
फिर क्या फर्क पड़ता है
और भी
प्रसन्नता का नाशक
तो नष्ट होता ही है
एक न एक दिन
फिर उसके नाश पर सोच क्यों ?
(प्रहलाद ·······प्रसन्नता)

                   देवयानी भारद्वाज