कैसे लगायें कोई  रंग,
गोरी की लाल चुनरी।
इस पे चढ़े न दूजा रंग,
गोरी की लाल चुनरी……….

सबको मारे भर पिचकारी,
खूब मचाये हुडदंग ।
गोरी की लाल चुनरी…..….

ढोल बजाए ,नगाड़ा बजाए,
और बजाए मृदंग।
गोरी की लाल चुनरी.........

जोश में फ़ाग ,कबीरा गाये,
पी पी के भंग सब मस्त।
गोरी की  लाल चुनरी।

सजनी ढूंढे अपने सजन को,
वो तो सखियों के संग मस्त।
गोरी की लाल चुनरी…….

आज सभी गले मिल लो,
कल सब अपने में मस्त।
गोरी की लाल चुनरी…….

स्नेहलता पाण्डेय
नई दिल्ली