भेदभाव को आज मिटाकर हमजोली बन जाते हैं,
आओ इस होली पर हम प्रेम के रंग लगाते हैं,
इंद्रधनुष के रंगों की सुंदर छोटा छा जाएगी,
हर फूल खिलेगा उपवन में हर कली मुस्कुराएगी,
एक दूजे को गले लगाकर गिले-शिकवे मिटाते हैं---
आओ इस होली पर हम प्रेम के रंग लगाते हैं,
मुख पर रंगों की हरियाली हो, चेहरे पर खुशी निराली हो द्वेष भाग को आज मिटा कर सतरंगी छटा फैलाते हैं, आओ इस होली पर हम प्रेम के रंग लगाते हैं,
खुशियों से दमके हर एक चेहरा यह होली मतवाली हो--- इंद्रधनुषी रंगों की सुंदर छटा निराली हो,
आओ इस माहौल को हम खुशनुमा बनाते हैं---
आओ इस होली पर हम प्रेम के रंग लगाते हैं,
संगीता वर्मा✍✍

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