अपनो की खुशियों के लिये ,
अपना जीवन ग़मो में बिता देती थी ।
सभी की खुशियों को के लिये ,
अपना जीवन कष्टो में वितीत कर देती थी।।
सबकी ख़ुशियों के लिये ,
अपनो की खुशियों का त्याग कर देती थी।
अपनो की खुशियों के लिये ,
मैं आँखों को आँसुओ से भीगा देती थी।।
सबकी राहो के काटो को,
अपने राहो मे ले आती थी।
अपनो की जरूरतों को पूरा करने ,
की कसम खाई थी।।
सबकी ख़ुशियों की खुशी के लिये ,
अपने आप को बुरा बनती थी ।
अपनो का प्यार पाने के लिये ,
अपना जीवन त्याग कर देती थी ।।..
🙂🙂🙂🙏🌸🌸
शिवानी ठाकुर ✍️✍️

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