प्रकृति की अद्भुत छटा निराली है
कहीं दुर्गम पर्वत है दिखते
कहीं चारों और हरियाली हैं
बीच में से झरने झरते
पहाड़ों की छटा निराली है
अमृत तुल्य झरने होते
पथिक की प्यास मिटा जाते
निर्मल स्वच्छ नीर है इनका
कल कल की ध्वनि प्यारी है
सोंधी सी खुशबू है इनकी
मन को मोहने वाली है
रंग बिरंगी पक्षी चहचहाते
सब कुछ यहां निराला है
अद्भुत छटा देख प्रकृति की
मन मेरा मतवाला है
शांत है वातावरण इतना
मन में शांति निराली है।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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