नारी त्याग तपस्या की पहचान, 
नारी मान सम्मान है अभिमान,
नारी त्याग तपस्या...... 

नारी घर की आन बान है शान,
नारी घर को बनाये नारी महान, 
नारी त्याग तपस्या...... 

नारी में छिपी है शक्ति अपार 
नारी गुणों का है अन्नत भंडार,
नारी त्याग तपस्या.......

हर दुख को छुपा कर सह कर, 
करती है सबका आदर सत्कार, 
नारी त्याग तपस्या.......

बिन नारी के होता नर अधूरा है, 
साथ नर अबला नारी सबला है,
नारी त्याग तपस्या.......

नर सम अधिकारिणी नारी है, 
उचित सम्मान की अधिकारी है, 
नारी त्याग तपस्या.......

हर फर्ज अपना निभाती नारी है, 
घर की मान मर्यादा शक्ति नारी है, 
नारी त्याग तपस्या...... 

घर द्वार रौशन करती वो नारी है,
नर की सफ़लता का राज़ नारी है, 
नारी त्याग तपस्या..... 

नारी त्याग तपस्या की पहचान, 
नारी मान सम्मान है अभिमान, 
नारी त्याग तपस्या......। 
   काव्य रचना -रजनी कटारे 
         जबलपुर (म. प्र.)