देखकर भी अनदेखा करना चाहते है
मगर ध्यान कैसे हटाएं ये जान न पाये कोई
रसोई  में चाची गरम गरम पकौड़े तल रही थी। इतने में रिया के भैया भी आ गए।और उस नेवले जैसी सूरत वाले की पूछ पड़ताल शुरू हो गई। निशांत नाम था उसका। वह रिया के 🏡घर के पिछले साइड रहता था। रिया के मुताबिक तो वह घर किसी पुलिस वाले का था।भैया ने पूछा कि आपके घर में कोई पुलिस में भी है। उसने कहा हां
वो मेरे फूफाजी है। भैया संतुष्ट हो गए। पर एक कन्फ्यूजन जरूर हो गया।
वो कुछ और कहते रहे::हम कुछ और समझते रहे::इसी गलतफहमी में हम दिल किसी और को दे बैठे।। 
इतने में रिया गरम गरम पकौड़े लेकर आ गई। रिया ने बड़े ही प्यार से उन्हें पकौड़े खिलाए।नाश्ता अभी चल ही रहा था। पर रिया उठ कर कमरे से बाहर जाने लगी। रास्ते में कुर्सियां पडीं थी जिन्हें हटाते हुए निशांत ने रिया के निकलने के लिए रास्ता बनाया। बस फिर क्या था। बाली उमर में लडकों की इसी शराफत का जादू चल जाता है सो चल गया...! 
::उन मनचलों पर ना मन चला जो मेरा::
::तेरी इस शराफत पर हम सब जीत के भी      
   हम सब हार गये::
बातों का सिलसिला खत्म हो गया। और मेहमान अपने घर वापिस चले गए। पर एक और सिलसिला चल पड़ा। अब तो रिया रोज छत पर जाती और नज़र उस सफेद मकान पर होतीं। जिन पर उन्हें किसी के आने का इंतजार होता।लेकिन रिया के साथ अजीब वाक्या होता। रिया जिधर भी मुड़ के देखती तो वहाँ कोई भी नहीं होता। लेकिन उस सफेद 🏠घर के बगल वाले घर की छोटी सी छत पर उसे जरूर रोज कोई देखता था।पर रिया कुछ समझ नहीं पा रही थी कि क्या ये वही शख्स है जिसे वो दिल दे बैठी थी या कोई और? 
  ::वो शक्ल दिल के हर कोने में बस गई जैसे:;
   ::जो कल जो अजनबी था वो अब अजनबी
     न लग रहा था मुझे::
रिया ने अभी सिर्फ नोवीं क्लास ही परीक्षा दी थी। 
अभी 🌴☀गर्मियों की छुट्टियां ही थी।छत पर एक दूसरे की झलक दिखाई दे जाती थी।घर दूर था इसलिए धुधंला ही सब नज़र आता था। पर फिर भी रिया के दिल में हजारों ज्ज़बात बस जाते।अब तो यह रोज की आदत बन चुकी थी। कि रोज शाम से लेकर रात सोने तक निगाहें एक दूसरे को ढूंढतीं रहती। एक दूसरे को रोज छुप छुप कर देखा करते। उन दोनों के छत का किनारा न होने का यही फायदा था कि जब आंखें खुलतीं तो नज़र एक दूसरे पर होतीं। जैसे खुदा ने दुनिया भर की रूमानियत इन्हें ही बख्श दी हो।।।। 


क्रमशः:  

                          ❤ मनु✍🏻


   संकलन